| 1 | ||||
| جَغَلُو[3] بیشی[4] تابَرَت[5] گَپ[6] بِزَنم[7] | اَرُخ[8] وريشه[9] تا كی لَپ بِزَنم[10] | تا كی از ترسِ لولو[11] رَپ[12] بِزنم | ||
| هرچه ما دَم[13] اَ تو بُرديم[14] ، بَسَه[15] | تَپَهكو[16] خورديم و مُرديم، بَسَه | |||
| 2 | ||||
| كه تو ای[17] خَفه دونیِ[18] شُل و بُلو[19] | سالها سَكَلَه[20] شديم اَ زيرِ جُلو[21] | اَ تَهتا[22] بَسيم[23] و از بيمِ لولو | ||
| كَپيديم[24] و جگرِ خود خورديم | ما خُ[25] از بَس چی[26] نگفتيم، مُرْديم | |||
| 3 | ||||
| هرچه ما هيچ نگفتيم بَس است | سالها بيهُده خُفتيم بَس است | راز از خَلق نِهُفْتيم بَس است | ||
| دلِ ما هرچه تحمل كرده | حال، ديوانگی اش گُل كرده | |||
| 4 | ||||
| هرچه خونابِ خَموشی خوردم | آنچه دندان به جگر بِفْشُرْدَم | ديدم آخر كه پُكيدَم[27] مُردَم | ||
| پرده از كار گُشودَم ناچار | درد دل بَرَتو[28] سُرودَم ناچار | |||
| 5 | ||||
| بود چندی كه از اين دِه پارَه | داشتم قطعِ نَظَر يك بارَه | من از اين خاك بُدم آوارَه | ||
| باز تقدير به چَنگُم آورد | اَندر اين مَحْبَسِ[29] تنگُم آورد | |||
| 6 | ||||
| فكرِ من كاش مُرَدَّد شده بود | پایِ من كاش مُقَيَّد شده بود | كاشكی راه به من سَد شده بود | ||
| كه در اين دهكده پا ننهادم | چون نهادم، به بلا افتادم | |||
| 7 | ||||
| حيف و صد حيف كه راهُم تَنگ است | دستِ من كوتَه و پايُم لَنْگ است | با منُش چرخ، سَرِ نيرنگ است | ||
| وَرْنَه میرفتم از اين خاك چنان | كه زِ گَردیم نبينند نشان[31] [30] | |||
| 8 | ||||
| دلُم از حسرت و مِحْنَت خون است | غُصَّه ی من زِ شُمار افزون است | تا به حدّی كه زِ حَدّ بيرون است | ||
| اين منم رانده و نابود افسوس | سوختم زآتشِ بی دود افسوس | |||
| 9 | ||||
| همه شب غَرقه به سيلِ اَشْكم | روز در غصَّه ی نون و كَشْكم | بَسكه خشكيده درونِ مَشْكم | ||
| مِنَوش[32] كَم شده و كُروش[33] اومده | از حرارت همه جاش اَ جوش اومده | |||
| 10 | ||||
| آخر ای دادرَسان من بشرم؟ | زآدَميّت مگر آخر بِدَرَم؟ | كه چنين مانده ی بی پا و سَرَم؟ | ||
| اَنْدَر اين گوشه خداگيرم من | گُنَهَم چيست كه زنجيرم من؟ | |||
| 11 | ||||
| وَه عجب شهرِ خراب آبادی ست! | دِهِ ويرانه ی بی بنيادی ست | هر طرف نالَه ای و فريادی ست | ||
| تو مگو شهر، بگو ويرانه | طَرَبی[34] نيست در اين غمخانَه | |||
| 12 | ||||
| مَردُمانش همه روح افسرده | همه از بی طَرَبی پژمُرده | رنجها بُرده و خونها خورده | ||
| هر كه را هست در اينجا مَسْكَن | كارِ او نيست بجز سوز و مَحَن | |||
| 13 | ||||
| در همه ی شهر نمی بينم باز | نكتَه دانی و رفيقی دَمْساز | چه كنم نيست مَرا يك همراز | ||
| در چنين مُلْك، بَسی دل تنگم | روز و شب با فَلَك اَندَر جنگَم[35] | |||
| 14 | ||||
| نيست كس تا سخنی فرمايد | كه زِ دل، زنگارِ غمم بِزْدايد | يا به جانم طربی افزايد | ||
| اُخت با هر كه شدم بیهوده است | صحبت از داردو[36] و كوهِ توده[37] است | |||
| 15 | ||||
| گَرچه در دَهر وفا معدوم است | بی وفايی به وفا موسوم است | اين بنا در همه جا مرسوم است | ||
| خاصَّه دراين دِهِ سَگمُرده صاحاب | خاصَّه اين شهرِ پُرآشوبِ خراب | |||
| 16 | ||||
| همه جا كاخِ تمّدُن برپاست | غيرازاين گوشه كه شَلْغَم شورباست | خوب از وضعِ خرابش پيداست | ||
| كه عجب وادیِ خَر بازاریست | از مَزايایِ تمدن عاریست | |||
| 17 | ||||
| نامِ اصليش به تاريخِ مَهان | هم سِتَهبان و هم اِسْتَهبانان | دارد از گُرگیِ ميلاد[38] نشان | ||
| چشمه قَهْری كه بُوَد قَهْرآلود | يا پازَهری كه بُوَد زَهرآلود | |||
| 18 | ||||
| غرقِ دريایِ بلائيم چرا؟ | موردِ قَهْرِ خدائيم چرا؟ | حاملِ بارِ جفائيم چرا؟ | ||
| بارِلاها مَگَه ما جُو دُزيدَيم؟ | كِردِگارا مَگَه ما گُو دُزيدَيم؟[39] | |||
| 19 | ||||
| تو كه با مَردُمِ اين شهری خَش | تا نيفتاده ای اندر آتش | پشت و پايیش زن و دست بكَش | ||
| جانِ من تا نَزَدنْدُت هُوهُو | زنده رو خيز و از اين شهر بُرُو | |||
| 20 | ||||
| اين منم شاعرِ عَيّار و ظريف | ساده و پاك و سخندان و حريف | مُفْلِسان را منم اينك به رديف | ||
| كُمُم[40] از گُشْنِگی هی سوت میزنَه | مثلِ شَئلِی[41] اَ چپق شوت میزنَه | |||
| 21 | ||||
| تا كه از گَردنَه ی گودِ قَلات[42] | چشمم افتاد به اِصْطَهبانات[43] | اَ ئی تَه خِرِف خونه و جونِ كاكات | ||
| جيگَرُم دوبُويه[44] شد و بختُم سوخت | خوشی از گُرده ی من فِرزی گُروخت | |||
| 22 | ||||
| من زمين گير[45] و جگر سوخته ام | اَ رو دنيا چيا[46] آموخته ام | چَك و چينا[47] كه من اندوخته ام | ||
| خودِ اون لَهجه و گُفتی كه مَراس | بَرَتون[48] يَیجا[49] میگَم بیكَم و كاس[50] | |||
| 23 | ||||
| ميگَم و هرچه ميگَم آسه ميگَم | دِگَه شِفْتُش[51] نمیدَم[52] راسه[53] ميگَم | اَ پيش هر كه نمیشناسه میگَم | ||
| تا نَگَن[54] بِتَپِ[55] او كُنْجِ تَريكو[56] | تا نَدَن[57] آرومَكی[58] مَه دَمِ چيكو[60] [59] | |||
| 24 | ||||
| اَگَه گَپْ زدم و گوشُت رفتِ فرو | سَرِ روش بِذار و مِقْ[61] مكن و مگو | نَه بِری خاله بوگو،[62] نَه پيشِ خالو[63] | ||
| كه اَزی پَكوپَسَلا،[64] گوواگو[65] نَشه | نُشْخوارِ لُو ليويرِ[66] اِی و او[67] نشه[68] | |||
| 25 | ||||
| جَغَلُو بختِ سياه سَرِشی[69] شده | از اَزَل، پيشونی نِوِشتُمو[70] ای شده | تو ببين كُلاپوسیْ[71] مَردُم كی شده!؟ | ||
| تا خر هَسيم میكُنَن بارِ بارومو[72] | تا آدم شديم میزَنَن اَ تو سَرومو[73] | |||
| 26 | ||||
| كار و كِردارا همه ش شده وارونه | من ميگَم[74] اُوسا بزرگو[75] نمیدونه | او نِوشْتا[76] نمیدَنُش[77] بُخونه | ||
| اَگه میشْنُفت كمكی اَ كارا میشد | وصله پينه ی كارِ بدبختا میشد | |||
| 27 | ||||
| زين كَلَنْدونِ[78] سيه خر بازار | اندكی بَر شُمُرَم از بسيار | لُنْج[79] و نيشتَك[80] نَزَنيدم زِنْهار | ||
| كه ماخام[81] بُنْجاقُتو[82] بِگَم و بِرَم | يادِ ناآمده ها بِدَم و بِرَم[83] | |||
| 28 | ||||
| بُن شديم تو ای كوتوكِ[84] افسرده | نَر و ماده ش پَكَر[85] و پِژمُرده | همه دارویِ خَموشی خورده | ||
| تو ای دِه هر كه كه پابَستْ شود | تا ماخات[86] بُغُروشه[87] از دست شود | |||
| 29 | ||||
| گفتموبيشتریشَم[88] لاشِ تو زدم[89] | اَ رو خَرمَن بافَه تون[90] بَرْجو[91] زدم[92] | دل به دريا زِ تَهِ پَستو[93] زدم | ||
| ما می گيم؛ يا سَر ميره يا ميا كُلا[94] | تا دِگَه تِی پا[95] نخورَن جَك و جَغَلا[96] | |||
| 30 | ||||
| نيست گفتِ من اگر رنگارنگ | يا چَرَند است و پَرَند است و جَفَنگ | كسی از بُوآ[97] نَشه تلخ و دلتنگ | ||
| اَگَرُش از سَر و تَه بَرخوانی[99] [98] | اشكی از ديده به رُخ بِفْشانی | |||
| 31 | ||||
| گَرچه دارد سخنِ من خنده | نَبُوَد خنده به ما زيبنده | كاكا[100] مَشتی تو نخند از بنده | ||
| ای همه ی وِر زَدَنام[101] خونِ دِله[102] | جنب و جوشی بخورين كه كارا وِله[104] [103] | |||
| 32 | ||||
| گِل و خِشْتُم زِ همين خَفَه دونيه[105] | اُو خورُشْتُم[106] زِ همين خَفَه دونيه | سرنِوِشتُم زِ همين خَفَه دونيه | ||
| بايَه[107] سختی بكَشَم من اِی زاتی[108] | كه نَنَه م[109] زيدَه[110] شُدَم سابُناتی[111] | |||
| 33 | ||||
| آری از مَردُمِ اين خاك منم | بی رَمَق[112] مونْدَه دل و جان و تَنم | جا نَمونْدَه ست[113] به حُب الوَطَنم | ||
| تا نكردن دَرو از رومو اَ كُلُوم[115] [114] | بيجيكيم[116] زود از ای مرز و از ای بوم | |||
| 34 | ||||
| كاش میشد كه از اين دِه پارَه[117] | بِريم و اُوسَری بِشيم[118] يكبارَه | اَزِی[119] غمخانه[120] بِشيم آواره | ||
| تا دِگَه جِنيّه[121] چَنْگُم نيارَه[122] | تو اِی گورِسونی[123] تَنْگُم نيارَه[124] | |||
| 35 | ||||
| شُوگُرُوز[125] بِريم[126] و اَ اينجانباشيم | تو جَر و مَنْجَرا[127] پيدا نباشيم | تو خِرِف خونه ی[128] دنيا نباشيم | ||
| تابُری[129] قاچُش[130] بِديم تاپامو واشَه[131] | كه اِی پس مونده بِری خودُشو باشَه[132] | |||
| 36 | ||||
| تَشِ توش بيگيرَه كه راهُم بَسَه[133] | دُزِ خُمْری[134] سَرِ راه بِنْشَسْتَه | دَسْ پَتی،[135] راه بَدُ، پا، بِشْكَسْتَه | ||
| از كُدُم پوزَه[136] بِرَم كه نَبينَهنُم؟[137] | كه نَكوُاَن[138] تو گُلوم تا تو نِشينُم؟[139] | |||
| 37 | ||||
| خُبْ اَگَه شهر و دِه و خونَه ی مَنَه | يا به گفتِ مَك و مُلا وَطَنَه | وطنِ مُشتی بی پُی، بی سَر و تَنَه[140] | ||
| به اونا دِگَه چه؟ كه راه خودومو نَدَن[141] | كوتوكو[142] بگيرَن و جَی خودومو[143] نَدَن | |||